ए ज़िन्दगी! (Ae Zindagee) Hindi Text Version

Ae Zindagee (View English text version)

ए ज़िन्दगी, कुछ पंक्तिया तेरे नाम!


ए ज़िन्दगी मुझे तू ही सीखा गयी,
जीना कैसे था तुझे,
ए ज़िन्दगी…।

बदलते वक्त के साथ बदले लोग,
पर सबसे करता रहा बंदगी;
टूटे रिश्तों को सुलझाने में बीती उम्र,
कैसे किश्तों में बीतती गयी ये ज़िन्दगी।

अधूरी किताब के साथ आए थे यहां,
पन्ने भरने में देते रहे अपने वक़्त की सियाई;
लिखते लिखते भूल ही गये,
जीनी भी थी, ये ज़िन्दगी।

सुलझाने में यहा वहा भटकते रहे,
ज़िन्दगी जी जैसे एक पहेली;
राज़ यही था कि अपनो को साथ लेता चलु,
गैरों मैं ढूंढता रहा खुशी,
और कही बीत गयी, ये ज़िन्दगी…।

मीले जो अपने बिछड़े सारे,
तोह गलतियां सुधारलू मैं सारी;
अपनो को अपना बना लू फिर,
तोह कह दु, हा जिली मैंने…
ये ज़िन्दगी।

बेहद खुबसूरत थी तु,
और खुबसूरत थे वो सारे लम्हे, जिन्हें मैं आज याद करता हु;
समझा नही उन गम में दिनों में ये,
बस कोसता रहा तुझे…
ए ज़िन्दगी।

सीखने में ही कि कैसे जीयु तुझे,
बीत गयी ये ज़िन्दगी;
मीले जो तु मुझे फिर उतनी ही,
तोह जीलु फिर से तुझे, ए ज़िन्दगी…।

ए ज़िन्दगी,
मुझे तू ही सीखा गयी;
जीना कैसे था तुझे,
ए ज़िन्दगी…


© Dipesh Bafna


 

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